Unacquainted Silhouettes

एक सरसराहट

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एक ये नदी है जो बहती रहती है
अपने तट को खोजती रहती है
समुन्दर की कल्पना में रस्ते उफनती है,
भटकते-भटकते दूसरी नदियों में घुल बैठती है

एक ये चिड़िया है जो बरखा में भी घोंसला बुनती है
टहनियां चुनती हैं, दरबदर घरों की छतों में छांव ढूंढती है
और फिर बरखा रुकने पर, अपने ही घोंसले को
कीचड़ में मिला देखती है

और एक ये मेरा मन है, तेरे आने की खबर को तरसता है
मौसम बदलते है, और तेरे गुलशन की आस देखता है
ख्वाबों को एक नयी उड़ान देनी की चाह रखता है!

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